congo fever कांगो फीवर

congo fever
congo fever  
cchf -Crimean-Congo haemorrhagic fever
पुरा नाम : क्राइमीन कांगो हेमेरेजिक फीवर [CCHF]
प्रकार : वायरल (विषाणुजनित) हेमेरेजिक फीवर
फैलने का माध्यम : पशुओं की त्वचा से चिपक कर रहने वाला 'हिमोरल' नामक परजीवी |
पशुओं के सम्पर्क से मनुष्य में फैलने का खतरा |

कांगो फीवर के लक्षण -

- बुखार के साथ माँसपेशियों में दर्द।
- चक्कर आना और सिरदर्द।
- आँखों में जलन और रोशनी से डर |
- संक्रमण के बढ़ने पर शरीर से खून का रिसाव भी संभव।

congo fever

कांगो फीवर का इतिहास -

- सर्वप्रथम 1944 में क्रीमिया नामक देश में इस की पहचान हुई
- वर्ष 1969 में इस संक्रमण से कांगों (दक्षिण अफ्रीका) में काफी नुकसान हुआ था
- इसलिये इसे क्रिमियन कांगों कहते है
- इस वायरल इन्फेक्शन से पीड़ित 30 से 80 फीसदी मामलों में रोगी की मौत हो जाती है
- राजस्थान व गुजरात में इसके मामले हाल ही में देखे गये।


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