VVPAT Full Form ; what is VVPAT?

VVPAT full form

  • VVPAT full form in english - Voter Verified Paper Audit Trail
  • VVPAT full form in हिंदी -मतदाता सत्यापित पेपर लेखा परीक्षण
VVPAT - Voter Verified Paper Audit Trail
 VVPAT

VVPAT क्या होता है ?

  • वीवीपीएटी से तात्पर्य है मतदाता सत्यापित पेपर लेखा परीक्षण यानी वोटर वेरिफायड पेपर ऑडिट ट्रायल (Voter Verified Paper Audit Trail: VVPAT)।
  • यह एक स्वतंत्र प्रिंटर मशीन होता है जो कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) ये जुड़ा होता है जिसके माध्यम से मतदाता यह जान सकता है कि उसने जिस प्रत्याशी एवं उसके चुनाव चिह्न को मत दिया है, वह वास्तव में उसे ही गया है।
  • ईवीएम मशीन पर किसी उम्मीदवार को मत देने के पश्चात मतदाता वीवीपीएटी मशीन की पर्ची के माध्यम से इसका सत्यापन कर सकता है ।
  • वीवीपीएटी बिजली कनेक्शन से नहीं जुड़ा होता बल्कि पावर रन बैटरी द्वारा संचालित होता है।
  • मतदान प्रक्रिया में ईवीएम मशीन से वीवीपीएटी को जोड़ने के लिए चुनाव संचालन नियम 1961 में 2013 में संशोधन किया गया।

VVPAT किस तरह काम करता है - 

  • जब मतदाता ईवीएम में कोई बटन दबाता है तब वीवीपीएटी एक पर्ची छापता है जिसमें मतदाता द्वारा जिस उम्मीदवार को मतदान दिया गया है उस उम्मीदवार का नाम एवं उसका चुनाव चिन्ह छपा होता है।
  • ईवीएम बटन दबाने के सात सेकेंड तक यह पर्ची देखी जा सकती है जिसके पश्चात यह पर्ची अलग होकर ड्रॉप बॉक्स में गिर जाती है।
  • इस पर्ची मशीन तक केवल मतदान अधिकारी की पहुंच होती है।
  • ईवीएम मशीन पर कुछ राजनीतिक दलों द्वारा छेड़छाड़ के आरोप लगाए जाते रहे हैं, लेकिन इसके प्रमाण नहीं मिले है। फिर भी भारतीय लोकतंत्र एवं उसकी चुनाव प्रणाली में लोगों की आस्था बनाए रखना सर्वोपरि है।

VVPAT की जरूरत क्यों हुई ?

  • इस उद्देस्य से वर्ष 2013 में सर्वोच्च न्यायालय ने वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के लिए चरणबद्ध तरीके से वीवीपीएटी शुरू करने का आदेश दिया था।
  • न्यायालय ने कहा था कि 'ईवीएम के साथ वीवीपीएटी मतदान प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करेगी। व्यवस्था में पूरी पारदर्शिता अपनाने तथा मतदाताओं की विश्वास बहाली के लिए ईवीएम को वीवीपीएटी से जोड़ना जरूरी है 

VVPAT पर शिकायतें व विवाद -

  •  वीवीपीएटी को ईवीएम से जोड़ने के बावजूद मतदान की पारदर्शिता पर शिकायतें जारी रही हैं।
  • शिकायत मुख्यतः दो स्तरों पर की जाती रही है।
  • एक वजह वीवीपीएटी को ईवीएम से जोड़ने पर मशीनों के खराब होने की रही है ।वर्ष 2017 के लोकसभा उप-चुनाव में वीवीपीएटी को बदलने की दर 15 प्रतिशत थी
  • जो इसकी असफलता की अनुमत दर 1-2 प्रतिशत की तुलना में काफी अधिक रही।हालांकि इसकी वजह आरंभ में वीवीपीएटी के साथ निहित खामियां रही हैं।
  • वर्ष 2017 एवं 2018 में इसके हार्डवेयर में समस्याएं आई और इसकी वजह लाने-ले जाने में तथा अत्यधिक गर्मी में इन मशीनों का एक्सपोजर रही है। बाद में चुनाव आयोग ने मशीन की प्रिंटिंग पूल से जुड़े उपकरणों में सुधार किया जिससे शिकायतें आनी कम हो गई ।

 VVPAT full form

  • दूसरी वजह वीवीपीएटी गणना संख्या को लेकर रही है।
  • कुछ राजनीतिक दल वीवीपीएटी की कम गणना से संतुष्ट नहीं हैं। 17वीं लोकसभा के गठन के लिए हुए चुनाव (2019) के दौरान देश के 21 राजनीतिक दलों ने चुनाव आयोग के दिशा-निर्देश संख्या 16.6 के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर किया था।
  • इस दिशा-निर्देश में प्रत्येक एसेंब्ली क्षेत्र के केवल एक मतदान केंद्र की वीवीपीएटी की गणना का प्रावधान था। वहीं राजनीतिक दल 50 प्रतिशत वीवीपीएटी की गणना/मिलान करने की मांग कर रहे थे ।

full form of vvpat 

  • चुनाव आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय को सूचित किया कि यदि 50 प्रतिशत वीवीपीएटी स्लीप का सत्यापन किया जाता है तो यह मतगणना को छह दिन विलंबित कर देगा। साथ ही आयोग ने भारतीय सांख्किकीय संगठन, कोलकाता (इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट) द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट का हवाला भी दिया जिसमें कहा गया है कि कुल 10.35 लाख मशीनों में से केवल 479 ईवीएम-वीवीपीएटी का सैंपल सत्यापन से प्रक्रिया में 99.9936 प्रतिशत विश्वास बहाली की जा सकती है।
  • सर्वोच्च न्यायालय ने राजनीतिक दलों की 50 प्रतिशत वीवीपीएटी की गणना की मांग को जरूर खारिज कर दिया परंतु चुनाव आयोग को प्रत्येक एसेंब्ली क्षेत्र से एक के बजाय पांच मतदान केंद्र के वीवीपीएटी की गणना के आदेश दिए।

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