iss spacewalk

 iss spacewalk ; अंतरिक्ष में बिना किसी पुरुष सहयोगी के स्पेसवॉक करेंगी महिलाएं
- जमीन से लेकर आसमान तक महिलाओं ने हर जगह अपना वर्चस्व कायम किया इनमे अब अन्तरिक्ष भी अछूता नहीं रहेगा। अंतरिक्ष पर भी महिलाएं चहलकदमी करेंगी। ऐतिहासिक पल 21 अक्टूबर 2019 को होने जा
रहा है, जब नासा पहली बार बिना किसी पुरुष सहयोगी के महिलाओं को स्पेसरॉक पर भेजेगा।
- जेसिका मीर और क्रिस्टीना कोच नाम की दो महिलाएं हैं जो इसको लीड करने वाली हैं ये अब दोनों ही एस्ट्रोनॉट हैं और फिलहाल इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में हैं।
- एस्ट्रोनॉट जेसिका मीर और क्रिस्टीना कोच ISS से बाहर निकलेंगी और स्पेस स्टेशन के सोलर पैनल में लगी लिथियम ऑयन बैटरी को बदलेंगी। ये दोनों पहले भी अंतरिक्ष की यात्रा का अनुभव ले चुकी हैं।
- नासा के अनुसार, 1965 में दुनिया के पहले स्पेसवॉक के बाद से केवल 14 महिलाओं ने स्पेसवॉक किया है बल्कि आज तक 213 पुरुष स्पेसवॉक  कर चुके हैं।
-  इसी साल मार्च में भी महिलाओं को स्पेसवॉक पर भेजने का प्लान बनाया गया था, पर स्पेससूट का सही साइज न मिलने से उसे स्थगित कर दिया गया। उसके बाद लोगों के हिसाब से स्पेससूट उपलब्ध कराने पर काम किया गया, अब उस हिसाब से स्पेससूट उपलब्ध हो चुके हैं इसलिए नए सिरे से इसका प्लान बनाया गया है।

ISS - International Space Station 

- अन्तर्राष्ट्रीय अन्तरिक्ष स्टेशन (International Space Station ISS) बाहरी अन्तरिक्ष में अनुसंधान सुविधा या शोध स्थल है जिसे पृथ्वी की निकटवर्ती कक्षा में स्थापित किया है।
- इस परियोजना का आरंभ 1998 में हुआ थ। वर्तमान समय में अन्तर्राष्ट्रीय अन्तरिक्ष स्टेशन अब तक बनाया गया सबसे बड़ा मानव निर्मित उपग्रह है।
- इसको इंसानों को रहने के लिए सभी सुविधाएं हो ध्यान में रखते हुए बनाया गया है यानी यह अंतरिक्ष में मानव निर्मित ऐसा स्टेशन है, जिससे पृथ्वी से कोई अंतरिक्ष यान जाकर मिल सकता है।
-इसके अलावा इसमें इतनी क्षमता है कि इस पर अंतरिक्ष यान उतारा जा सके इन्हें पृथ्वी की लो-ऑर्बिट कक्षा में ही स्थापित किया जाता है।
- अन्तर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन को अंतरिक्ष में छोटे-छोटे टुकड़ों में ले जाकर इसके ऑर्बिट यानी कक्ष में स्थापित किया गया है।
-1998 में सबसे पहला मॉड्यूल प्रक्षेपित किया गया था 2 नवम्बर, 2000 से लगातार अंतरिक्ष यात्री (Astronaut) इस स्टेशन में कार्य कर रहे हैं।

ISS और भारत 

- इसी साल 15 अगस्त को लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐलान किया था किभारत 2022 में अपने किसी बेटे या बेटी कोअंतरिक्ष में भेजेगा।
- भारत के इस महत्वपूर्ण अभियान की जिम्मेदारी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो के कंधों पर है।
- इसरो तमाम राष्ट्रीय एजेंसियों, प्रयोगशालाओं, शिक्षा संस्थानों तथा उद्योग क्षेत्र के साथ व्यापक सहयोग करके गगनयान कार्यक्रम के उद्देश्यों को सफल बनाने में जुटा हुआ है।

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