Hornbill Festival of Nagaland

Hornbill Festival of Nagaland
Hornbill Festival of Nagaland

नागालैंड का हॉर्नबिल महोत्सव

  • नागालैंड के प्रसिद्ध हॉर्नबिल महोत्सव की शुरूआत एक दिसंबर से हो गई है।
  • हॉनर्नबिल महोत्सव एक सालाना उत्सव है जिसका आयोजन कोहिमा से 12 किलोमिटर दूर स्थित नगा हेरिटेज गांव कि सामा में राज्य पर्यटन विभाग द्वारा किया जाता है।
  • दस दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव को क्लीन फेस्टिवल (जीरो वेस्ट और बगैर सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग किए) के रूप में मनाने का फैसला किया है।

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  • इस महोत्सव में नागालैंड के 17 प्रमुख जनजातियों और पूर्वोत्तर के लोकप्रिय कलाकारों के अलावा हंगरी और थाईलैंड के ग्रूप भी इस बार फेस्टिबल में परफॉर्म करेंगे।
  • इसके अलावा इस साल सांस्कृतिक परफॉर्मेस के साथ माउंट टियोजुवु और जूखू वैली में ट्रेकिंग और हाईकिंग, वर्ल्ड वॉर-II रैली, मीमा में एक पत्थर खींच प्रतियोगिता, कोहिमा में एक हेरिटेज वॉक को भी हॉर्नबिल फेस्टिवल का हिस्सा बनाया गया है।
  • 10 दिनों तक चलने वाला यह फेस्टिवल नगा हेरिटेज विलेज किसामा के साथ कोहिमा, मोकोकचुंग, दीमापुर, फेक और वोखा जिले में भी आयोजित किया जाएगा।

hornbill festival of nagaland 2019 

  • नागालैंड राज्य के स्थापना दिवस (1 दिसंबर, 1963) के अवसर पर हर साल हॉर्नबिल महोत्सव का आयोजन किया जाता है।
  • इस बार राज्य में 20वें हॉर्नबिल महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। पहली बार इस उत्सव का आयोजन वर्ष 2000 में किया गया था।
  • प्रारंभ में इसे 7 दिनों के लिये आयोजित किया गया, किंतु इसकी बढ़ती सफलता, उपलब्धि एवं पर्यटन को मद्देनज़र बाद में इसे 10 दिनों में परिवर्तित कर दिया गया।
  • इस उत्सव का आयोजन राज्य के पर्यटन तथा कला एवं संस्कृति मंत्रालय द्वारा किया जाता है।

हॉर्नबिल महोत्सव का उद्देश्य

  • यह सांस्कृतिक महोत्सव नृत्य, संगीत और भोजन के साथ-साथ वर्षों से अपनाई गई नगा समुदाय की समृद्ध संस्कृति एवं परंपराओं का कलात्मक प्रदर्शन है, जो कि नगा समाज की विविधताओं को प्रदर्शित करता का उद्देश्य नगालैंड की समृद्ध संस्कृति को पुनर्जीवित करने तथा सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ इसकी परंपराओं को प्रदर्शित करना है।

हॉर्नबिल पक्षी

  • यह पक्षी 'ग्रेट इंडियन हॉर्नबिल' जाना जाता है। यह मुख्य रूप से आर्द्र सदाबहार और मिश्रित पर्णपाती वनों में पाया जाता है।
  • इसे IUCN की रेड डाटा बुक की 'Near Threatened' सूची में रखा गया है। यह अरुणाचल प्रदेश तथा केरल राज्य का एक 'राजकीय पक्षी' (State Bird) भी है।
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